Brics submit 2026
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ब्रिक्स (BRICS) दुनिया के सबसे प्रभावशाली उभरते हुए बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है। हाल ही में भारत की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के प्रतिष्ठित 'भारत मंडपम' में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit 2026) का सफलतापूर्वक समापन हुआ है।
इस ब्लॉग पोस्ट में हम इस ऐतिहासिक सम्मेलन के मुख्य बिंदुओं, 'नई दिल्ली घोषणापत्र' और इसके वैश्विक प्रभावों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
1. सम्मेलन की थीम (Theme)
वर्ष 2026 के लिए भारत की अध्यक्षता की मुख्य थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखी गई थी।
2. नई दिल्ली घोषणापत्र (New Delhi Declaration) के मुख्य बिंदु
सम्मेलन के दौरान सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' को अपनाया। इसमें दुनिया भर के कई गंभीर मुद्दों पर मजबूत और स्पष्ट रुख अपनाया गया है:
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की है। घोषणापत्र में विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद, आतंकी वित्तपोषण और सेफ हेवन्स (सुरक्षित ठिकानों) को खत्म करने पर जोर दिया गया।
साथ ही, पिछले साल जम्मू-कश्मीर (पहलगाम) में हुए आतंकवादी हमले की स्पष्ट निंदा की गई। वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज और संयुक्त राष्ट्र सुधार: ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और वैश्विक वित्तीय संस्थानों (जैसे IMF और विश्व बैंक) में सुधार की पुरजोर मांग की है ताकि ग्लोबल साउथ की नुमाइंदगी और आवाज को मजबूत किया जा सके। रूस और चीन ने सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता के समर्थन को दोहराया।
ग्लोबल ट्रेड और टैरिफ नीतियां: देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर गंभीर चिंता जताई जो वैश्विक व्यापार नियमों (WTO) के खिलाफ हैं।
इसके अलावा, पर्यावरण के नाम पर लगाए जाने वाले अनुचित शुल्कों और एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का कड़ा विरोध किया गया। क्षेत्रीय संघर्ष और शांति (West Asia & Gaza): पश्चिम एशिया और गाजा में जारी तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए अधिकतम संयम बरतने, मानवीय सहायता सुचारू रूप से पहुंचाने और द्वि-राष्ट्र समाधान (Two-state solution) का समर्थन किया गया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऊर्जा सुरक्षा: भविष्य की तकनीकों के लिए 'एआई की वैश्विक शासन प्रणाली' पर जोर दिया गया। इसके साथ ही स्मार्ट ग्रिड, ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए मिलकर काम करने पर सहमति बनी।
3. भारत के लिए इस सम्मेलन के क्या मायने हैं?
वैश्विक कूटनीति का केंद्र: भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह वैश्विक मंचों पर विकसित और विकासशील देशों के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभा सकता है।
पीएम मोदी और द्विपक्षीय वार्ता: सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठकें हुईं।
भारत-चीन के बीच सीमा पर शांति और व्यापारिक असंतुलन को दूर करने को लेकर हुई चर्चा ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दी है। पर्यावरण का संदेश: सम्मेलन की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी और अन्य वैश्विक नेताओं ने 'भारत मंडपम' परिसर में पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संदेश दिया।
निष्कर्ष
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 न सिर्फ कूटनीतिक रूप से बेहद सफल रहा, बल्कि इसने दुनिया को यह भी दिखा दिया कि बहुध्रुवीय दुनिया (Multipolar World) में विकासशील देशों की एकजुटता कितनी महत्वपूर्ण है। भारत ने अपनी अध्यक्षता सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद अब ब्रिक्स की कमान औपचारिक रूप से चीन को सौंप दी है।
यह सम्मेलन आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और निष्पक्ष व्यापारिक नीतियों की रूपरेखा तय करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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